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राजनीतिहोम

CJP का असर या सरकार की मजबूरी? 36 घंटे में लिए गए बड़े फैसलों की पूरी कहानी

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Last updated: 2026/07/24 at 10:26 PM
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दिल्ली में 20 जुलाई पुलिस कार्रवाई के बाद आंदोलन शांत होने के बजाय और तेज हो गया. जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों की संख्या बढ़ती गई और अंततः केंद्र सरकार को अपने रुख पर पुनर्विचार करना पड़ा.

नीट पेपर लीक के विरोध प्रदर्शन की जो चिंगारी 30 दिन पहले सुलगी थी वो अब देश के शिक्षा तंत्र के खिलाफ एक बड़े आंदोलन का रूप ले लिया है. दिल्ली के जंतर-मंतर से निकला ये गुस्सा अब धीरे-धीरे देश के दूसरे शहरों तक फैल गया है. केंद्र सरकार पहले तो इस पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया, लेकिन आखिरकार उसे अपनी चुप्पी तोड़नी पड़ी और बीते 36 घंटे के दौरान ताबड़तोड़ फैसले लेने पड़े. लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष ने पीएम आवास के बाहर कांग्रेस सासंदों के साथ प्रदर्शन किया, जिसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद आगे आए और सरकार ने भीतर एक के बाद एक कई फैसले लिए गए.

फास्ट-ट्रैक कोर्ट का ऐलान

पीएम मोदी ने एक्स पर पोस्ट कर बताया कि पेपर लीक के आरोपियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाए जाएंगे. पीएम मोदी ने कहा, ‘इस संबंध में निर्देश दे दिए गए हैं कि संबंधित विभाग आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करें. युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा.’ इसके कुछ ही घंटों भीतर दिल्ली हाई कोर्ट ने इसके लिए विशेष कोर्ट भी तय कर दिया. इसके बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और PMO राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह के बीच करीब 4 घंटे तक हाई-स्तरीय बैठक चली.

इसके बाद सरकार ने अपना रुख बदला और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रतिनिधियों को बातचीत का न्योता दिया. वार्ता के स्थान को लेकर काफी खींचतान के बाद आखिर में ‘कॉन्स्टिट्यूशन क्लब’ को बातचीत के लिए चुना गया. भारी दबाव के बीच सरकार ने प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई करते हुए शिक्षा सचिव विनीत जोशी को पद से हटा दिया.

रील्स फॉर्मेट में वीडियो जारी कर पीएम मोदी का संदेश

पीएम मोदी एक दिन में दूसरी बार इस मुद्दे पर बोले. आधी रात को रील्स फॉर्मेट में वीडियो जारी किया, जिसे खासतौर पर युवाओं तक सीधा संदेश पहुंचाने के लिए बनाया गया था. उन्होंने कहा, ‘मैं जानता हूं कि पेपर लीक कोई सामान्य बात नहीं है. यह लाखों छात्रों और उनके अभिभावकों के लिए बेहद दर्दनाक है.’ उन्होंने इस मामले में और कड़ी कार्रवाई की भी बात कही थी, जिसे 24 जुलाई की शाम तक अमल में भी लाया गया. न्यूज एजेंसी आईएएनएस की रिपोर्ट के मुताबिक एजेंसी से जुड़े 47 लोगों को हटा दिया गया है और इसमें से कुछ लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी.

सरकार एनटीए के पुनर्गठन की योजना पर काम कर रही है. इसके तहत अगले एक महीने के भीतर एजेंसी की संरचना में बड़े बदलाव किए जाएंगे. एनटीए के कामकाज और परीक्षा संचालन प्रणाली में व्यापक सुधार किए जाएंगे. खास तौर पर एजेंसी द्वारा अपनाई जाने वाली आउटसोर्सिंग व्यवस्था को बदला जाएगा. यह बदलाव विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों के आधार पर किए जाएंगे. सरकार का उद्देश्य ऐसी लीक प्रूफ व्यवस्था तैयार करना है, जिससे राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक जैसी घटनाओं पर पूरी तरह रोक लगाई जा सके और परीक्षा प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बने.

सोनम वांगचुक ने तोड़ा अनशन

दूसरी तरफ शिक्षा सुधारों की मांग को लेकर 25 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की बिगड़ती सेहत ने सरकार की चिंता बढ़ा दी थी. रात को केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह गुरुग्राम के अस्पताल पहुंचे. सरकार ने आश्वासन दिया कि प्रदर्शनकारी छात्रों पर कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं होगी और पेपर लीक रोकने के कड़े कदम उठाए जाएंगे. इसके बाद सोनम वांगचुक ने अपना अनशन समाप्त किया.

कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में शुक्रवार (24 जुलाई 2026) को केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह की कॉकरोच जनता पार्टी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास और राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका के साथ बैठक हुई. बैठक के बाद आशुतोष रांका और सौरव दास ने कहा कि मंत्रियों के साथ करीब 10 मिनट तक बैठक हुई. उन्होंने कहा, ‘हमने सरकार के सामने तीन मांगें रखीं. पीड़ितों के परिजनों को एक करोड़ मुआवजा, धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा और छात्रों पर दर्ज किए गए केस को वापस लिया जाए.’

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अड़ी सीजेपी

आशुतोष रांका ने कहा, ‘धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे या कैबिनेट से बर्खास्तगी के बिना कुछ भी हमें मंजूर नहीं होगा. सरकार ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की हमारी मांग पर शनिवार दोपहर तक का समय मांगा है. हमने सरकार को बता दिया है कि पूरे देश में प्रदर्शन हो रहे हैं. अगर जल्द ही धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा या बर्खास्तगी नहीं हुई तो आंदोलन और तेज होगा.’

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने 23 जून को एक इंटरव्यू में सीजेपी को दहशतगर्दों की बी-टीम बताया था और आरोप लगाया था कि यह संगठन उन ताकतों की ओर से काम कर रहा है जिन्हें जनता पहले ही नकार चुकी है. सीजेपी ने 20 जून को जंतर-मंतर पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया था. आठ दिन बाद सोनम वांगचुक और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) के छह कार्यकर्ताओं ने भी वहां अनशन शुरू किया. करीब दो सप्ताह बाद सोशल मीडिया पर, वांगचुक की बिगड़ती सेहत के वीडियो वायरल होने के बाद आंदोलन ने गति पकड़ ली.

कैसे अचानक तेज हुआ आंदोलन?

18 जुलाई को पुलिस उन्हें जबरन सफदरजंग अस्पताल ले गई, जिससे छात्रों और प्रदर्शनकारियों में व्यापक आक्रोश फैल गया. इसके बाद 20 जुलाई को संसद तक विशाल मार्च निकाला गया, जिसमें पुलिस ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले भी छोड़े. आंदोलन शांत होने के बजाय पुलिस कार्रवाई के बाद और तेज हो गया। जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों की संख्या बढ़ती गई और अंततः केंद्र सरकार को अपने रुख पर पुनर्विचार करना पड़ा। उसी दिन जेपी नड्डा ने पहली बार अपने आवास पर सीजेपी नेतृत्व के साथ औपचारिक बैठक की, जिससे राजनीतिक संवाद की शुरुआत हुई.

केंद्रीय कैबिनेट ने शुक्रवार को पेपर लीक के मामलों में सजा को और सख्त बनाने वाले विधेयक को मंजूरी दे दी है. रिपोर्ट के मुताबिक यह विधेयक अगले हफ्ते संसद में पेश किया जा सकता है. सूत्रों के मुताबिक बिल में पेपर लीक के ऑर्गेनाइज्ड क्राइम के मामले में 10 साल की सजा और 10 करोड़ रुपये जुर्माने का प्रावधान है.

TAGGED: Breaking News, CJP Protest, CJP का प्रदर्शन, Cockroach Janta Party, Dharmendra Pradhan, NTA Reform, छात्र आंदोलन, जंतर मंतर प्रदर्शन, फास्ट ट्रैक कोर्ट, शिक्षा मंत्रालय, सोनम वांगचुक
Report Khabar July 24, 2026
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