सुन्दरपुरा। श्रावण मास के पावन अवसर पर सुन्दरपुरा से नारायणी माता तक भव्य कावड़ यात्रा निकाली गई। धार्मिक आस्था और उत्साह से भरी इस यात्रा में बड़ी संख्या में शिवभक्तों ने हिस्सा लिया। कांवड़िए पूरे रास्ते भगवान शिव के जयकारे लगाते हुए आगे बढ़े। यात्रा के दौरान ‘हर-हर महादेव’ और ‘बोल बम’ के जयघोष से पूरा वातावरण भक्तिमय नजर आया।
श्रद्धालुओं में दिखा जबरदस्त उत्साह
सुन्दरपुरा से शुरू हुई कावड़ यात्रा में श्रद्धालु कांवड़ लेकर नारायणी माता के लिए रवाना हुए। सुबह से ही यात्रा को लेकर भक्तों में खासा उत्साह देखने को मिला। युवा श्रद्धालुओं के साथ अन्य भक्त भी पूरे जोश और श्रद्धा के साथ यात्रा में शामिल हुए।
कांवड़िए पैदल यात्रा करते हुए निर्धारित मार्ग से नारायणी माता मंदिर की ओर आगे बढ़े। रास्ते में धार्मिक गीतों और जयकारों ने माहौल को पूरी तरह भक्तिमय बना दिया।
जगह-जगह हुआ श्रद्धालुओं का स्वागत
कावड़ यात्रा के दौरान मार्ग में श्रद्धालुओं की सेवा और स्वागत के लिए विभिन्न स्थानों पर व्यवस्थाएं की गईं। लोगों ने कांवड़ियों के लिए पानी और अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था कर सेवा भाव का परिचय दिया।
यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं का कहना रहा कि श्रावण मास में भगवान शिव की आराधना और कावड़ यात्रा का विशेष धार्मिक महत्व है। इसी आस्था के साथ भक्त नारायणी माता तक पहुंचे।
नारायणी माता पहुंचकर की पूजा-अर्चना
कावड़ यात्रा के नारायणी माता पहुंचने के बाद श्रद्धालुओं ने मंदिर में पूजा-अर्चना की और धार्मिक अनुष्ठानों में हिस्सा लिया। भक्तों ने भगवान शिव और माता नारायणी से क्षेत्र में सुख-शांति, समृद्धि और खुशहाली की कामना की।
यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं में एक-दूसरे के प्रति सहयोग और सेवा की भावना भी देखने को मिली। पूरे आयोजन ने धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक एकता और भाईचारे का संदेश दिया।

हर-हर महादेव के जयकारों से गूंजा क्षेत्र
सुन्दरपुरा से नारायणी माता तक निकली कावड़ यात्रा के दौरान जगह-जगह ‘हर-हर महादेव’, ‘बोल बम’ के जयकारे सुनाई दिए। भक्तों के उत्साह और धार्मिक माहौल ने यात्रा को खास बना दिया।
श्रावण मास में आयोजित इस कावड़ यात्रा ने क्षेत्र में भक्तिमय माहौल कायम किया। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भागीदारी ने आयोजन को और भी भव्य रूप दिया।
कुल मिलाकर, सुन्दरपुरा से नारायणी माता तक निकली कावड़ यात्रा श्रद्धा, भक्ति और आस्था का प्रतीक बनी। भक्तों ने पूरे उत्साह के साथ यात्रा में भाग लिया और नारायणी माता के दर्शन कर अपनी मनोकामनाओं के लिए प्रार्थना की।
