Javelin Throw Final Qualification Rule
ग्लासगो में जेवलिन थ्रो क्वालिफिकेशन मार्क न छू पाने के बावजूद विशेष नियम के तहत नीरज, रोहित यादव और यशवीर सिंह सहित टॉप-12 एथलीट्स ने फाइनल में जगह बना ली है। जानें जेवलिन थ्रो का यह खास क्वालिफिकेशन नियम।
बिना क्वालीफिकेशन फाइनल में पहुंचे 12 एथलीट
इन 12 एथलीट्स में 3 भारतीय जेवलिन थ्रोअर भी शामिल हैं, जिन्हें फाइनल का टिकट मिल गया है। टोक्यो ओलंपिक चैंपियन नीरज चोपड़ा के साथ रोहित यादव और यशवीर सिंह को फाइनल में भी थ्रो करने का मौका मिलेगा, जो 31 जुलाई को मेडल इवेंट होगा। अब ऐसे में सवाल ये है कि जब कोई भी एथलीट क्वालीफिकेशन मार्क छू भी नहीं पाया तो फिर 12 एथलीट्स फाइनल में कैसे पहुंचे। चलिए जेवलिन थ्रो के क्वलीफिकेशन नियम को समझते हैं।
क्वालिफिकेशन राउंड के दौरान नीरज 79.61 मीटर के सर्वश्रेष्ठ प्रयास के साथ पांचवें स्थान पर रहे, जबकि रोहित यादव 78.37 मीटर के साथ नौवां और यशवीर सिंह 78.36 मीटर के साथ 10वां स्थान हासिल किया। इन तीनों एथलीट्स का बेस्ट थ्रो क्वालीफिकेशन मार्क से काफी दूर था। लेकिन जेवलिन थ्रो के क्वालीफिकेशन नियम से सिर्फ तीनों भारतीय ही नहीं बल्कि अन्य 9 थ्रोअर्स को भी फाइनल में जगह मिल गई।
क्या है नियम?
किसी भी जेवलिन थ्रो के इवेंट में भाग लेने वाले खिलाड़ियों को पहले राउंड में 2 ग्रुप्स में बांटा जाता है अगर उनकी संख्या 20 से अधिक हो तो। अगर एथलीट्स 20 से कम हैं, तो एक ही ग्रुप में प्रतिस्पर्धा करते हैं। क्वालीफिकेशन राउंड में एक दूर तय की जाती है, जिसे पार करने वाले एथलीट्स को फाइनल में प्रतिस्पर्धा करने का मौका मिलता है। अगर भाग लेने वाले सभी खिलाड़ियों ने क्वालीफिकेशन मार्क पार किया तो सभी को फाइनल में जगह मिल जाएगी।
