यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (UPI) से भुगतान पर शुल्क लगाने की योजना बन रही है, लेकिन पर्सन टू पर्सन (पी टू पी) ट्रांजेक्शन पर शुल्क नहीं लगेगा। हाल ही में लोकसभा ने टैक्स संबंधी संशोधन का एक बिल पारित किया है, जिसमें यूपीआई लेन-देन पर शुल्क की संभावनाओं का उल्लेख है, लेकिन शुल्क लगाने के तरीके और राशि अभी तय नहीं की गई है। वित्त मंत्रालय और जानकारों का कहना है कि यह निर्णय भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) और नेशनल पेमेंट कारपोरेशन ऑफ इंडिया (NCPI) द्वारा किया जाएगा।
वित्त मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में यूपीआई से 24,161.69 करोड़ ट्रांजेक्शन हुए, जिसमें से 71 प्रतिशत राशि पीटीपी ट्रांजेक्शन थी। इसका अर्थ है कि ये लेनदेन दो व्यक्तियों के बीच थे और इन पर कोई शुल्क नहीं लगेगा। वहीं, पर्सन टू मर्चेंट (पीटूएम) लॉन्च में ट्रांजेक्शन का 29 प्रतिशत हिस्सा है। इस भुगतान प्रणाली में 2000 रुपये से अधिक के पीटूएम टाइप के ट्रांजेक्शन पर शुल्क लगाया जा सकता है।
आंकड़ों के अनुसार, पिछले वित्त वर्ष में 2000 रुपये से अधिक के लेनदेन की संख्या बहुत कम थी, जिससे पीटूपी लेनदेन पर कोई असर नहीं पड़ेगा। बिल के माध्यम से पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम एक्ट 2007 में संशोधन किया जा रहा है, जिससे बैंकों या किसी भी वित्तीय संस्थान को यूपीआई से शुल्क नहीं लगाने की अनुमति मिलेगी।
जानकारों के मुताबिक, बैंकों को यूपीआई सर्विस को चलाने में सालाना करीब 10,000 करोड़ रुपये का खर्च आता है। इस समय 700 से अधिक बैंक यूपीआई सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। यदि शुल्क लागू होता है, तो बैंकों को यूपीआई ट्रांजेक्शन प्रणाली को मजबूत बनाने में सहायता मिलेगी।
हालांकि, अभी इस बारे में कोई निश्चित जानकारी या घोषणा नहीं की गई है कि किस प्रकार के ट्रांजेक्शन पर शुल्क लगेगा और कितनी राशि पर यह लागू होगा।
इसलिए, यह स्पष्ट है कि यूपीआई में शुल्क लगाने की योजना चर्चा में है, लेकिन इसकी प्रक्रियाएं और विवरण अभी स्पष्ट नहीं हैं। इस विषय पर आगे की जानकारी और फैसले के लिए आरबीआई और एनपीसीआई का इंतजार करना होगा।
